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(1) हर्ष-हर्ष है नया वर्ष है, लक्ष्य नये संघर्ष नये। छोड़ पुरानी बातों को अब, स्वप्न सजाए नये-नये।। (01) जात धर्म से ऊपर उठ कर हम ना उलझे मतभेदों में। मानवता यह धर्…
Read more »◆ देवहरण घनाक्षरी ◆ (शिल्प~8,8,8,9/ अंत में तीन लघु) भूख से बिलखे मन, चिथड़ों से ढका तन, रोटी मिले मिटे भूख, तन ढके कर जतन। खाल…
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